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माठऔर शिशॠको जोड़ने वाली गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² कब काटी जानी चाहिà¤?
मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ के विशेष सचिव à¤à¤µà¤‚ मिशन निदेशक (राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ मिशन) मनोज à¤à¤¾à¤²à¤¾à¤¨à¥€ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ जारी की गई इस à¤à¤¡à¤µà¤¾à¤‡à¤œà¤¼à¤°à¥€ में गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² को बांधने और काटने (कà¥à¤²à¥ˆà¤‚पिंग) से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ सलाह दी गई है.
यह à¤à¤¡à¤µà¤¾à¤‡à¤œà¤¼à¤°à¥€ सà¤à¥€ राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ और केंदà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚ को à¤à¥‡à¤œà¥€ गई है. इस à¤à¤¡à¤µà¤¾à¤‡à¤œà¤¼à¤°à¥€ में डिलीवरी के बाद पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा के ख़à¥à¤¦ बाहर आने, उसके बाद कà¥à¤²à¥ˆà¤‚पिंग और उससे जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ फ़ायदों के बारे में सलाह दी गई है.
WHO के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, जनà¥à¤® के वक़à¥à¤¤ नवजात शिशॠगरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² (अंबिकल कॉरà¥à¤¡) के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ मां से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ रहता है. जोकि पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा (इसे à¤à¥à¤°à¥‚ण की पोषक थैली à¤à¥€ कहते हैं जिसके à¤à¤• सिरे से गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² जà¥à¤¡à¤¼à¥€ होती है और दूसरा सिरा बचà¥à¤šà¥‡ की नाà¤à¤¿ से) का à¤à¤• हिसà¥à¤¸à¤¾ है.
समापà¥à¤¤
आमतौर पर बचà¥à¤šà¥‡ को पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा से अलग करने लिठअंबिकल कॉरà¥à¤¡ को बांधकर काट दिया जाता है. विशà¥à¤µ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संगठन के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•़, अमूमन कॉरà¥à¤¡ कà¥à¤²à¥ˆà¤‚मà¥à¤ªà¤¿à¤‚ग (गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² को बांधना और काटना) के लिठ60 सेकंड का वक़à¥à¤¤ लिया जाता है. इसे अरà¥à¤²à¥€ कॉरà¥à¤¡ कà¥à¤²à¥ˆà¤‚मà¥à¤ªà¤¿à¤‚ग कहते हैं. लेकिन कई बार इसके लिठ60 सेकंड यानी à¤à¤• मिनट से ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ का समय à¤à¥€ लिया जाता है, जिसे डिलेड कॉरà¥à¤¡ कà¥à¤²à¥ˆà¤‚मà¥à¤ªà¤¿à¤‚ग कहते हैं.
गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤²
नाल को जब देर से काटते हैं तो नवजात बचà¥à¤šà¥‡ और पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा के बीच खून का पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ बना रहता है, जिससे बचà¥à¤šà¥‡ में आयरन का सà¥à¤¤à¤° बढ़ता है और इसका असर बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के छह महीने तक बना रहता है. डबà¥à¤²à¥à¤¯à¥‚à¤à¤šà¤“ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•़, ये उन नवजात बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ साबित होगा जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जनà¥à¤® के बाद अचà¥à¤›à¤¾ खानपान मिलना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो.
विशà¥à¤µ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संगठन की सलाह है कि गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² को à¤à¤• मिनट से पहले नहीं काटने से बचà¥à¤šà¥‡ और उसके साथ ही मां की सेहत à¤à¥€ बेहतर रहती है.
विशà¥à¤µ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संगठन ने बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® को लेकर कà¥à¤› सलाह जारी की थीं. जिसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, अगर बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® के बाद वेंटिलेशन की ज़रूरत नहीं है तो कॉरà¥à¤¡ को à¤à¤• मिनट से पहले नहीं काटा जाना चाहिà¤.
अगर बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® के बाद वेंटिलेशन की ज़रूरत है तो कॉरà¥à¤¡ को तà¥à¤°à¤‚त काटा जाना चाहिठऔर बचà¥à¤šà¥‡ को ज़रूरी वेंटिलेशन दिया जाना चाहिà¤. इसमें देरी करने की सलाह डबà¥à¤²à¥à¤¯à¥‚à¤à¤šà¤“ बिलà¥à¤•à¥à¤² नहीं देता.
राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ बाल सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सलाहकार पà¥à¤°à¥‹à¤«à¤¼à¥‡à¤¸à¤° डॉ. अरà¥à¤£ कà¥à¤®à¤¾à¤° सिंह ने कॉरà¥à¤¡ कà¥à¤²à¥ˆà¤‚पिग पर शोध किया है. वो यह तो मानते हैं कि डिलेड कà¥à¤²à¥ˆà¤‚पिंग फ़ायदेमंद है लेकिन वो पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा के सेलà¥à¤«à¤¼ डिसà¥à¤šà¤¾à¤°à¥à¤œ (नेचà¥à¤°à¤² तरीक़े से बाहर आने) की à¤à¥€ वक़ालत करते हैं.
डिलेड कà¥à¤²à¥ˆà¤‚पिंग को कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ माना जाता है बेहतर?
गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤²
उनके अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ मिसà¥à¤° के à¤à¤¸à¥‡ बहà¥à¤¤ से उदाहरण मिलते हैं जिसमें पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा के नेचà¥à¤°à¤² तरीक़े से बाहर आने के बाद अंबिकल कॉरà¥à¤¡ काटने की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ होती है. हालांकि यह बिलà¥à¤•à¥à¤² à¤à¥€ सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ नहीं है कि कब और कैसे यह तरीक़ा बदल गया.
उनका मानना है कि बीते कà¥à¤› दशकों में अरà¥à¤²à¥€ कॉरà¥à¤¡ कà¥à¤²à¥ˆà¤‚पिंग काफी पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ हà¥à¤† है और अब यही सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤‚डरà¥à¤¡ à¤à¥€ बन चà¥à¤•ा है.
लेकिन फोरà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² की असोसिà¤à¤Ÿ डायरेकà¥à¤Ÿà¤° मधॠगोयल इस बात से इनक़ार करती हैं. उनका कहना है कि à¤à¤¸à¤¾ नहीं है कि अरà¥à¤²à¥€ कॉरà¥à¤¡ कà¥à¤²à¥ˆà¤‚पिंग ही की जा रही है. आमतौर पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° डिलेड कॉरà¥à¤¡ कà¥à¤²à¥ˆà¤‚पिंग ही करते हैं लेकिन अगर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ सामानà¥à¤¯ ना हो या फिर बचà¥à¤šà¥‡ को सेहत से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ कोई दिक़à¥à¤•़त हो तो अरà¥à¤²à¥€ कॉरà¥à¤¡ कà¥à¤²à¥ˆà¤‚पिंग की जाती है.
बकौल डॉकà¥à¤Ÿà¤° मधॠ"पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के हर केस को à¤à¤• ही तरीक़े से नहीं देखा जा सकता है. हर केस की अपनी कॉमà¥à¤ªà¥à¤²à¤¿à¤•ेशन होती हैं और कई बार डिलीवरी के दौरान परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ बदल जाती हैं, à¤à¤¸à¥‡ में à¤à¤• तय नियम के साथ काम नहीं किया जा सकता."
हालांकि वो ये मानती हैं कि डिलेड कà¥à¤²à¥ˆà¤‚पिंग बचà¥à¤šà¥‡ के लिठफ़ायदेमंद है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे बचà¥à¤šà¥‡ में खून की कमी नहीं होती और इससे बचà¥à¤šà¥‡ के à¤à¤¨à¤¿à¤®à¤¿à¤• होने का ख़तरा कम रहता है.
जब हमने उनसे इस à¤à¤¡à¤µà¤¾à¤‡à¤œà¤¼à¤°à¥€ के संदरà¥à¤ में पूछा तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने यह तो माना कि इस बारे में सà¥à¤¨à¤¾ ज़रूर है लेकिन यह डिलीवरी की पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ विधि नहीं है.
वहीं अमरीकन जरà¥à¤¨à¤² ऑफ़ पेरेंटोनोलॉजी में पà¥à¤°à¤•ाशित सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€ का हवाला देते हà¥à¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤° अरà¥à¤£ कà¥à¤®à¤¾à¤° सिंह कहते हैं गरà¥à¤ में पल रहे बचà¥à¤šà¥‡ का बाहरी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में आना à¤à¤• बेहद मà¥à¤¶à¥à¤•िल पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है. à¤à¤¸à¥‡ में हर चीज़ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखा जाना ज़रूरी है.
गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤²
उनके अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, आज के समय में ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° डिलीवरी (क़रीब 70 फ़ीसदी) सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ से ही की जाने लगी है. उनके मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•़, जब à¤à¤• बचà¥à¤šà¥‡ का जनà¥à¤® होता है तो उसके शारीरिक और मानसिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ दोनों पर ही धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने की ज़रूरत होती है. ख़ासतौर पर मानसिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मनà¥à¤·à¥à¤¯ का दिमाग़ शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ हज़ार दिनों में (गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के नौ महीने और उसके बाद के लगà¤à¤— दो साल) लगà¤à¤— नबà¥à¤¬à¥‡ फ़ीसदी विकासित हो जाता है.
वो कहते हैं कि à¤à¤¸à¥‡ में ये ज़रूरी है कि जिस वक़à¥à¤¤ बचà¥à¤šà¤¾ गरà¥à¤ में है और जब गरà¥à¤ से बाहर आ रहा है तो उन बातों का विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखा जाठजिससे उसके दिमाग़ पर बà¥à¤°à¤¾ असर ना पड़े.
"अब डिलीवरी को लेकर à¤à¤• अजीब सी हड़बड़ी नज़र आती है जिसमें मां को शà¥à¤°à¥‚ में ही ऑकà¥à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¨ हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨ का इंजेकà¥à¤¶à¤¨ दे दिया जाता है जबकि यह सब नेचà¥à¤°à¤² तरीक़े से होना चाहिà¤. इसे
ऑकà¥à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¨ à¤à¤• नेचà¥à¤°à¤² हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨ है जो बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के समय मददगार होता है. लेकिन नेचà¥à¤°à¤² तरीक़े से शरीर में इसका रिसाव तà¤à¥€ होता है जब मां को अनà¥à¤•ूल परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ मिले.
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के लगà¤à¤— पांच मिनट के बाद पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा ख़à¥à¤¦ बाहर आ जाता है. यहीं से बचà¥à¤šà¤¾ पोषक ततà¥à¤µ के साथ-साथ ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ à¤à¥€ लेता है. लेकिन जब बचà¥à¤šà¤¾ गरà¥à¤ से बाहर आता है तो उसे हवा से ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ लेनी होती है और उसके फेफड़ों को सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ होने में कम से कम à¤à¤• मिनट का वक़à¥à¤¤ लगता है.
नेचà¥à¤°à¤² तरीक़े को बेहतर मानने की वजहें
गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² जब बचà¥à¤šà¤¾ इस बदलाव के अनà¥à¤°à¥‚प ढल जाता है तो पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा à¤à¥€ बाहर निकल आता है. उनका मानना है कि डिलीवरी के बाद पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा के बाहर आने का इंतज़ार करना चाहिठऔर उसके बाद कॉरà¥à¤¡ कà¥à¤²à¥ˆà¤‚पिंग करनी चाहिà¤.
उनका दावा है कि बचà¥à¤šà¥‡ के पैदा होने के साथ ही अगर कॉरà¥à¤¡ कà¥à¤²à¥ˆà¤ªà¤¿à¤‚ग की जाठतो बचà¥à¤šà¥‡ की हारà¥à¤Ÿ-बीट बढ़ जाती है.
हालांकि वो ये ज़रूर कहते हैं कि ये फ़ॉरà¥à¤®à¥‚ला हर बचà¥à¤šà¥‡ पर लागू नहीं किया जा सकता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि हर बचà¥à¤šà¥‡ की बरà¥à¤¥-कंडिशन अलग-अलग होती है. उनका मानना है कि अगर डिलीवरी बिलà¥à¤•à¥à¤² नॉरà¥à¤®à¤² होनी है और किसी à¤à¥€ तरह की परेशानी नहीं है तो इस तरीक़ा अपनाया जा सकता है. लेकिन अगर किसी à¤à¥€ तरह की कॉमà¥à¤ªà¥à¤²à¤¿à¤•ेशन है तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह से ही आगे बढ़ना चाहिà¤.
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